होम्योपैथिक चिकित्सा

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वैकल्पिक चिकित्सा

रविवार, 12 जून 2022

अध्‍याय-17 सौन्‍द्धर्य समस्‍यायें ( होम्योपैथी के चमत्कार भाग -2 )

 

 ( होम्योपैथी के चमत्कार  भाग -2 )

                    अध्‍याय-17

                  सौन्‍द्धर्य समस्‍यायें

क्र0

         रोग

औषधिय

1

आग से क्षुलस जाना-

आर्टिका यूरेन्‍स

2

आग से जलने पर जलन होने पर

कैंथरीज

3

चेहरे पर लाल लाल दॉग, धॉवों के निशानों को मिटाने के लिये

ग्रेफाईटिस

4

त्‍वचा के काले पड जाने पर

आसैनिक एल्‍ब

5

नाई से दाडी बनवाने के बाद उदभेद

रसटाक्‍स

6

 चहरे के पैदाईशी निशान या चिन्‍हों को मिटाने

आक्‍जैलिक ऐसिड

7

 क्षत चिन्‍हों के विलयन के लिये

एनागलिस

8

 चेहरे की त्‍वचा के रंग बदलने पर

कोलोफाईलम

9

 ओठो के फटने पर

नेट्रम म्‍यूर, पेट्रोलियम

10

 चेचक के दॉग मिटाने हेतु

बेरियोलिनम सीएम, सारासिनिया क्‍यू

11

 चर्म रोग

स्‍पांजिया क्‍यू

12

सौर्द्धय प्रसाधनों के अति उपयोग से चहरे पर उदभेद

बोबिस्‍टा):-

13

मुंहॉसे के दॉगों के लिये

बरबेरिस एक्‍वा

14

बार बार मुहासे निकलते हो उसमें पस भी हो

साईलेसिया

15

चेहरे पर छोटी छोटी फुंसियो से धिरे काले काले शक्‍त दाने जो पक जाये

काली ब्रोम

16

त्‍वचा पर छिछडों की भरमार

क्रियेजोटम ,काली सल्‍फ फेरम फॉस

17

प्रसव के बाद पेट लटकने पर

कोक्रस

18

पेट पर झुरूरीयॉ और दॉग

साईलेसिया ,हिपर सल्‍फ ,सीपिया

19

हाथों व अंगुलियों में दरारे

सैनिक्‍युला

20

ऐसी युवक्तियॉ जो अपनी पूर्ण उम्र में भी जिनका शारीरिक विकास न हो

लाईकोपोडियम

21

पेल्विक गडर अर्थात नितम्‍ब का अविकसित होना

प्‍लम्‍बम

22

चेहरे के झाईयों पर

सीपियॉ

 

 

               

                       अध्‍याय-17

                   16- सौन्‍द्धर्य समस्‍यायें

1-आग से क्षुलस जाना- (आर्टिका यूरेन्‍स क्‍यू) आग से क्षुलस जाने पर उसका प्रभाव त्‍वचा पर होता है इससे त्‍वचा क्षुलस जाती है ,इस प्रकार के क्षुलस जाने पर आर्टिका यूरेन्‍स मूल अर्क दबा का लोशन बना कर लगाने से एंव इस दवा की 30 शक्ति की दवा के प्रयोग से आर्श्‍चय जनक लाभ होता है इसमें कोई अतिश्‍योक्‍ती नही है । इस सर्न्‍दभ में डॉ टायलर का उदाहरण जो डॉ0 सत्‍यवृत जी ने अपनी मेटेरिया मेडिका में लिखा है इससे इस औषधिय के महत्‍व को आसानी से समक्षा जा सकता है । एक बच्‍चे का मुंह आग से क्षुलस गया था उसे होम्‍योपैथिक चिकित्‍सालय में आर्टिका यूरेन्‍स का लोशन रूई में भिगोकर लगाया गया ,अगले दिन यह पहचानना कठिन हो गया कि उस बच्‍चे का मुंह आग से क्षुलस गया था । उन्‍होने एक डॉक्‍टर का उल्‍लेख करते हुऐ लिखा है कि आर्टिका यूरेन्‍स के आर्श्‍चयजनक प्रभावों की बात सुनकर उसे ऐसा लगता जैसे यह कोई परियो की कहानी हो ,परन्‍तु एक दिन उनका हाथ जल गया उन्‍होने आर्टिका यूरेन्‍स का प्रयोग किया और उन्‍हे आर्श्‍चयजनक लाभ हुआ । इस दवा से जले हुऐ पुराने धॉव जो अनेक उपचारों के बाद भी ठीक नही होते , इसके प्रयोग से आर्श्‍चयजनक लाभ होता है । परन्‍तु यहॉ पर इस बात का विशेष ध्‍यान रखना चाहिये कि यह क्षुलसने या ऊपरी त्‍वचा के जलने पर प्रयेग की जाती है गहरे जलने पर नही । आग से जल जाने या क्षुलस जाने पर बहुत से व्‍यक्तियों की त्‍वचा क्षुलस कर अपनी प्राकृतिक सौन्‍द्धर्यता खो देती है ऐसे में यह दवा उनके लिये किसी बरदान से कम नही है ।

2-आग से जलने पर जलन होने पर (कैंथरीज) :- आग से जलने पर उसमें जलन होने की स्थिति में इसका प्रयोग करने से जलन में तत्‍काल लाभ होता है । इसलिये जलने पर इस दवा का मूल अर्क पानी में मिला कर जली हुई जगह पर लगाने से जलन तत्‍काल ठीक हो जाती है इसके साथ इस औषधि की 30 पोटेंशी की दवा को दिन में दो तीन बार देने से आग से जलने पर होने वाली जलन में आराम होता है । यह तो बात हुई होम्‍यो0 में आग से जल जाने पर जलन को कम करने के लिये परन्‍तु यहॉ पर मै एक उदाहरण देना चाहूंगा एक्‍युपंचर चिकित्‍सा में एक उपचार मौक्‍सा है जिसमें मरीज को जलती हुई मौक्‍सा की जड को शरीर के निश्चित पाईट पर उस पाईट को सेकने के लिये प्रयोग किया जाता है परन्‍तु कभी कभी मौक्‍सा के जलते हुऐ टुकड त्‍वचा पर गिर जाती है इससे त्‍वचा जल जाया करती थी इस पर कैंथरीज मूल अर्क मे लगाने से जलन तो तत्‍काल ठीक हो जाती थी इसके साथ हमने पाया कि जलन के साथ वहां के निशान आदि भी कुछ दिनों में इस प्रकार भर जाते कि यह पहचाना कठिन हो जाता कि वह जगह पहले जली थी ,इस लिय यह कहना कि कैथरीज केवल जलन ही नही जलने के कई उपर्सगों में भी लाभकारी दवा है ।

3- चेहरे पर लाल लाल दॉग, धॉवों के निशानों को मिटाने के लिये (ग्रेफाईटिस) :-चेहरे पर लाल लाल दॉग हो रहे हो तो ऐसी अवस्‍था में ग्रेफाईटिस 30 का प्रयोग दिन में तीन बार कुछ दिनों तक करना चाहिये । धॉवों के निशानों को मिटाने के लिये ग्रेफाईटिस लाभकारी दवा है । (डॉ ई0ए0फैरिगटन)           

4-त्‍वचा के काले पड जाने पर (आसैनिक एल्‍ब) :- डॉ0 शंकरन सहाब का कहना है कि जब कोई लक्षण सामने न आये उस समय आसैनिक एल्‍ब 3 या 6 शक्ति में देना चाहिये इससे त्‍वचा अपने स्‍वाभाविक स्थिति में आ जाती है । हमने अपने प्रेक्टिस के मध्‍य यह पाया कि कई व्‍यक्तियों को यह दवा 30 शक्ति में प्रयोग करने से कुछ दिनों में परिणाम सामने आने लगते है ।

5-नाई से दाडी बनवाने के बाद उदभेद (रसटाक्‍स) :- नाई से दाढी बनवाने के बाद त्‍वचा में उदभेद के लिये रसटाक्‍स काफी लाभदायी दवा है । इस दवा को 30 या 200 शक्ति में प्रयोग किया जा सकता है

6- चहरे के पैदाईशी निशान या चिन्‍हों को मिटाने (आक्‍जैलिक ऐसिड):- चहरे के पैदाईशी निशान या चिन्‍हों को मिटाने के लिये आक्‍जैलिक ऐसिड 30 शक्ति का प्रयोग दिन में तीन बार या 200 शक्ति का प्रयोग दो दिन के अन्‍तर से किया जा सकता है । इसके प्रयोग से पैदाईशी निशान या चिन्‍ह धीरे धीरे मिटने लगते है ।

7- क्षत चिन्‍हों के विलयन के लिये (एनागलिस) :- क्षत चिन्‍हों के विलयन या मिटाने के लिये एनागलिस बहुत अच्‍छी दवा है जो हथेली में हुऐ एक्‍जीमा को भी ठीक कर सकती है । प्रारम्‍भ में कुछ दिनों तक इसकी 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिये बाद में 200 या 1एम शक्ति का प्रयोग भी किया जा सकता है ।

8- चेहरे की त्‍वचा के रंग बदलने पर (कोलोफाईलम) :- डॉ0हेलमथ के अनुसार स्त्रियों में चेहरे पर त्‍वचा के रंग बदलने पर (अनियमित मासिक स्‍त्राव के कारण) कोलोफाईलम काफी अच्‍छी दवा है इसका प्रयोग आवश्‍यकतानुसार 30 ,200, या और भी उच्‍च शक्ति में किया जा सकता है ।

9- ओठो के फटने पर (नेट्रम म्‍यूर, पेट्रोलियम) :- सर्दयों में यदि ओठ फट रहे हो तो नेट्रम म्‍यूर 30 में लेना चाहिये अन्‍य चिकित्‍सको का कहना है कि सर्दियों में हाथ पैर व मुंह के फटने पर पेट्रोलियम 200 शक्ति का प्रयोग करना चाहिये । नाभी पर कडुवा तेल लगाने से ओठ नही फटते । ग्‍लीसरीन में नेट्रम म्‍यूर30 व पेट्रोलियम 30 पोटेंशि में मिला कर इसे फटे हुऐ स्‍थान पर लगाने से बडे ही अच्‍छे परिणाम मिलते है ।

10- चेचक के दॉग मिटाने हेतु (बेरियोलिनम सीएम, सारासिनिया क्‍यू ) :- चेचक के दॉगों को मिटाने के लिये डॉ0 सिन्‍हा सहाब का अभिमत है कि सारासिनिया क्‍यू को पानी में मिला कर किसी कपडे से ढके रहने से दॉग मिट जाते है । पुराने से पुराने चेचक के दॉग बेरियोलिनम सीएम शक्ति की दवा महिने में एक खुराक प्रयोग करने से सभी दॉग मिट जाते है एव गढढे भी भर जाते है । अनुभव मंजू दुबे उम्र लगभग 60 वर्ष की होगी उसे पहले बेरियोलिनम सी एम में दिया गया साथ ही सारासिनिया क्‍यू को कपडे में भिंगा कर रख गया परन्तु इससे कोई भी परिणाम न मिलने पर होम्‍योपंचर  चिकित्‍सा के माध्‍यम से बेरियोलिनम सी एम डिस्‍पोजेबिल निडिल में भर कर रिन-9 पाईट पर पंचरिग किया गया, इससे बडे ही अच्‍छे परिणाम मिले ।

चेचक के दॉगों को मिटाने के लिये होम्‍योपंचर में रिन 9 पाईन्‍ट काफी उपयोगी पाईट है । होम्‍योपंचर चिकित्‍सा में बेरियोलिनम दवा के प्रयोग से बडे ही आशनुरूप परिणाम मिलते है एंव दॉग धीरे धीर मिटने लगते है ।

11- चर्म रोग (स्‍पांजिया क्‍यू):- डॉ0 पर्सी कहते है कि चाहे किसी भी प्रकार का चर्मरोग क्‍यो न हो स्‍पांजिया क्‍यू के सेवन करने से चर्मरोग ठीक हो जाता है । इस दवा की दस से पन्‍द्रह बूंदे आधे कप पानी में दिन में तीन बार लेना चाहिये ।

12- सौर्द्धय प्रसाधनों के अति उपयोग से चहरे पर उदभेद (बोबिस्‍टा):- सौद्धर्य प्रसाधनों के अति उपयोग के कारण उत्‍पन्‍न उदभेद चहरे पर मस्‍से हो जाना या अन्‍य प्रकार के उदभेद होने की स्थिति में बोविस्‍टा का प्रयोग करना चाहिये ।     

13-मुंहॉसे के दॉगों के लिये (बरबेरिस एक्‍वा ):-चेहरे पर मुंहॉसे ,होने दॉगों के लिये बरबेरिस एक्‍वा मूल अर्क लेने से लाभ होता है इसे चहरे पर लगाना भी चाहिये ।

14-बार बार मुहासे निकलते हो उसमें पस भी हो (साईलेसिया):- बार बार मुंहॉसे निकलते हो तो साईलेसिया 200 में दो तीन दिन के अन्‍तर से देना चाहिये ।

15-चेहरे पर छोटी छोटी फुंसियो से धिरे काले काले शक्‍त दाने जो पक जाये (काली ब्रोम) :- चेहरे की फुंसियॉ जो पक कर चेचक के दानों की तरह बीच में से दब जाते हो तो ऐसी स्थिति में काली ब्रोम 30 या 200 में  प्रयोग करना चाहिये । होम्‍योपंचर चिकित्‍सा में काली ब्रोम 1एम या सी एम में रिन 7 पाईन्‍ट पर पंचरिग करने से आशानुरूप परिणाम मिलते है ।

16-त्‍वचा पर छिछडों की भरमार (क्रियेजोटम ,काली सल्‍फ फेरम फॉस) यदि त्‍वचा पर छिछडों की भरमार हो तो ऐसी अवस्‍था में क्रियेजोटम 200 तीन दिन के अन्‍तर से देना चाहिये एंव काली सल्‍फ 12 एक्‍स में दिनमें तीन बार दे इसके साथ फेरम फॉस 12 में दिन में तीन बार देने से छिछडों में बहुत अच्‍छे परिणाम मिलते है ।

 17-प्रसव के बाद पेट लटकने पर (कोक्रस):- यदि प्रसव पश्‍चात पेट लटक गया हो तो क्रोकस 30 शक्ति में दिन में तीन बार देना चाहिये ।

18-पेट पर झुरूरीयॉ और दॉग (साईलेसिया ,हिपर सल्‍फ ,सीपिया):- पेट पर झुरूरीयॉ और दॉगों के लिये साईलेसिया,हिपर सल्‍फ ,एवं सीपिया का प्रयोग लक्षणानुसार करना चाहिये ।

  19-हाथों व अंगुलियों में दरारे (सैनिक्‍युला):- हाथों व अंगुलियों में दरारे हो तो सैनिक्‍युला 30 में प्रयोग करना चाहिये ।

20-ऐसी युवक्तियॉ जो अपनी पूर्ण उम्र में भी जिनका शारीरिक विकास न हो (लाईकोपोडियम):- ऐसी लडकीयॉ जो 16-17 वर्ष की हो जाने पर भी नही बढती उनका शारीरिक विकास नही होता ,छाती दबी रहती है शरीर पुष्‍ट नही होता उन्‍हे लाईकोपोडियम दवा प्रारम्‍भ में 30 शक्ति में दिन में तीन बार देना चाहिये  इससे उनका शारीरिक विकास होने लगता है ।

21-पेल्विक गडर अर्थात नितम्‍ब का अविकसित होना (प्‍लम्‍बम) :-ऐसी युवक्तियॉ जो पूर्ण वयस्‍कता प्राप्‍त करने के बाद भी जिनकी जरायु पुष्‍ट या विकसित नही होती उन्‍हे प्‍लम्‍बम 200 का प्रयोग तीन चार दिन के अन्‍तर से करना चाहिये । इससे उनका पेल्विक अर्थात नितम्‍ब प्रदेश पूरी तरह से विकसित होने लगता है ।

22-चेहरे के झाईयों पर (सीपियॉ):-चेहरे की झाईयों के लिये सीपिया 200 की एक खुराक रोज एंव बरबेरिस अक्‍वा क्‍यू की दस दस बूंदे नियमित लेने से उचित परिणाम मिलते है ।

(23)-झाईयों पर लगाने की दवा (यूजेनिया जैम्‍बेारा क्‍यू):- यूजेनिया जैम्‍बोरा दवा झाईयों पर लगाने की सर्वश्रेष्‍ट दवा है ,इस दवा का मूल अर्क को थोडे से पानी में मिला कर झाईयों पर लगा सकते है या फिर उसे ग्‍लीसरीन में या वैसलीन में मिला कर लगा सकते है । वैसलीन या ग्‍लीसरीन में इसे मिलाना हो तो उसे इतना मिलाये ताकि उसका रंग डाली गयी दवा के रंग का हो जाये । इस दवा को सुविधानुसार झईयों में लगा सकते है

 

                     

 

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