होम्योपैथिक चिकित्सा

होम्योपैथिक चिकित्सा
वैकल्पिक चिकित्सा

रविवार, 12 जून 2022

अध्‍याय-14 हिदय रोग ( होम्योपैथी के चमत्कार भाग -2 )

 

 ( होम्योपैथी के चमत्कार  भाग -2 )

                     अध्‍याय-14

                     हिदय रोग

क्र

रोग लक्षण

औषधियॉ

 

उच्‍च रक्‍तचाप:-

 

1

सिस्‍टोलिक प्रेसर ऊंचा डायोस्‍टोलिक प्रसर नीचा

बैराईटा म्‍यूर 6-एक्‍स

2

सिस्‍टोलिक एंव डायस्‍टोलिक दोनों प्रोसेस के बढने पर

बेरेट्रम विराइड

3

उच्‍च रक्‍तचाप

स्‍पार्टिथम 6

4

उच्‍च रक्‍तचाप (रावलफिया)

सर्पगंधा

5

बढे हुऐ रक्‍तचाप को तुरन्‍त नियंत्रण

ग्‍लोनाईन

6

 हाई ब्‍लड प्रसर-

ओरम मेट 30

7

हार्डफेल की त्‍वरित एक्‍शन वाली महौषधी

एमोनियम कार्ब 30

8

रक्‍तचाप नियंत्रण

जेल्‍सेमियम 30

9

हिद्रय टॉनिक

क्रेटेगस आक्‍स क्‍यू

10

स्‍नायु संस्‍थान की कमजोरी

एसिड फॉस

11

रक्‍तचाप घटता बढता हो

 

एम्‍ब्राग्रिसिया 200 एंव जैल्‍सीमिय 30 एंव केटेगस क्‍यू

12

बढे हुऐ कॉलेस्‍ट्रोल का घटाने मे

कैटिगस क्‍यू

13

 अर्जीण के कारण हिदय स्‍पंदन

नक्‍स बोमिका 30

14

स्‍त्रीयो के अर्जीण के कारण हिदय स्‍पंदन

पल्‍सेटिला 30

 

 

 

 

 

               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

                     अध्‍याय-14

                     हिदय रोग

                     1- उच्‍च रक्‍तचाप

1-सिस्‍टोलिक प्रेसर ऊंचा डायोस्‍टोलिक प्रसर नीचा (बैराईटा म्‍यूर 6-एक्‍स):- जब सिस्‍टोलिक प्रेसर ऊंचा एंव डायोस्‍टोलिक दबाब नीचा हो तब यह दवा विशेष उपयोगी है । डॉ0 ब्‍लेक बुड का कहना है कि जिस किसी हालत के रक्‍तचाप में यह राहत पहुचाती है । वृद्धो के उच्‍च रक्‍त चाप की यह एक स्‍पेसफिक दवा मानी जाती है ।   

2-सिस्‍टोलिक एंव डायस्‍टोलिक दोनों प्रोसेस के बढने पर (बेरेट्रम विराइड) डॉ0 बोरिक का कहना है कि सिस्‍टोलिक एंव डायस्‍टोलिक दोनों प्रोसेस के बढने पर बेरेट्रम विराइड 6 एक्‍स लाभदायक है परन्‍तु कुछ चि‍कित्‍सकों का मत है कि यह डायस्‍टोलिक प्रेशर को ही नियंत्रित करता है ।

 

3- उच्‍च रक्‍तचाप (स्‍पार्टिथम 6) :- उच्‍च रक्‍तचाप की स्‍पार्टिथम 6 बहुत ही अच्‍छी दबा है

4-उच्‍च रक्‍तचाप रावलफिया (सर्पगंधा) :- इसे उच्‍च रक्‍तचाप में इस दवा की दस दस बूंदे दिन में तीन या चार बार आवश्‍यकतानुसार दी जा सकती है ।

5-बढे हुऐ रक्‍तचाप को तुरन्‍त नियंत्रण (ग्‍लोनाईन) : ग्‍लोनाईन बढे हुऐ रक्‍तचाप को तुरन्‍त नियंत्रित करने की दवाओं में से एक है ।

6- हाई ब्‍लड प्रसर- (ओरम मेट 30) :- रक्‍त का एक स्‍थान पर संचय इस औषधि का विशेष लक्षण है । इसलिये हाई ब्‍लड प्रेसर मे का कारण रक्‍त का एक स्‍थान पर संचय हो तो औरम मेट 30 की मात्रा देने से लाभ होता है । हाई ब्‍लड प्रेशर की अन्‍य अवस्‍थाओं में बैराईटा म्‍यूर-6एक्‍स, ग्‍लोनाईन, तथा डिजिटेलिस पर भी लक्षणानुसार ध्‍यान देना चाहिये ।

7- हार्डफेल की त्‍वरित एक्‍शन वाली महौषधी (एमोनियम कार्ब 30):- हिद्रय रोगी के लिये एमोनियम कार्ब 30 त्‍वरित एक्‍शन वाली महौषधी है । जब हार्ट फेल होने की स्थिति निर्मित हो रही हो तो इस औषधि को याद किया जाना चाहिये  इस औषधि की चंद खुराक से रोगी के प्राण बचाये जा सकते है ।

8-रक्‍तचाप नियंत्रण (जेल्‍सेमियम 30):- जेल्‍सेमियम 30 के नियमित प्रयोग से रक्‍त चाप को नियंत्रित किया जा सकता है यह निम्‍न रक्‍त चाप एंव उच्‍च रक्‍तचाप दोनो से ग्रसित व्‍यक्ति इसका उपयोग कर सकते है ।

9-हिद्रय टॉनिक (क्रेटेगस आक्‍स क्‍यू) क्रेटेगस क्‍यू हार्ट टानिक है, हिद्रय रोगीयों के हिद्रय को मजबूत करने के लिये इस दवा की  दस दस बूंदे दिन में तीन बार देना चाहिये । हार्ट अटैक को रोकने की यह एक कारगर दबा है इसे दवा का प्रयोग दोनो तरह के  निम्‍न व उच्‍च रक्‍तचाप में किया जा सकता है ।

10-स्‍नायु संस्‍थान की कमजोरी (एसिड फॉस ) :- स्‍नायु संस्‍थान की कमजोरी के कारण निम्‍न एंव उच्‍च रक्‍त चाप हो तो यह दवा उपयोगी है इस दवा की 30 शक्ति दिन मे तीन बार उपयोग की जा सकती है ।

11-रक्‍तचाप घटता बढता हो (एम्‍ब्राग्रिसिया 200 एंव जैल्‍सीमिय 30 एंव केटेगस क्‍यू )

 : कुछ हिद्रय रोगीयों का रक्‍तचाप  कभी घटता, कभी बढता हो, तो उसे एम्‍ब्राग्रिसिया 200 एंव जैल्‍सीमिय 30 एंव केटेगस क्‍यू देना चाहिये । उक्‍त दवाओं को प्रर्याक्रम से भी दिया जा सकता है ।

12-बढे हुऐ कॉलेस्‍ट्रोल का घटाने मे (कैटिगस क्‍यू) यह दबा कॉलेस्‍ट्रोल को घोल कर मूत्र मार्ग के रास्‍ते से बाहर निकाल देती है एंव यह दवा हिद्रय रोगियों के लिये टॉनिक है जो हिदय को शक्ति प्रदान करती है एंव हिद्रय संचालन में मदद करती है ।

 13- अर्जीण के कारण हिदय स्‍पंदन (नक्‍स बोमिका 30):- कुछ लोगों को अर्जीण के कारण हिदय स्‍पंदन होता है या गैस बनने से हिद्रय में गैस के बनने से हिद्रय स्‍पंदन होता हो तो नक्‍स बोमिका 30, देना चाहिये इसके साथ यदि गैस पूरे पेट में भरती हो तो चाईना 30 तथा गैस ऊपर की तरफ जाती हो तो लाईकोपोडियम30 तथा नीचे की तरफ बने तो कार्बोवेज30 देना चाहिये ।

14-स्‍त्रीयो के अर्जीण के कारण हिदय स्‍पंदन (पल्‍सेटिला 30):- यदि स्‍त्रीयो को अर्जीण के कारण हिदय स्‍पंदन में पल्‍सेटिला 30 देना चाहिये ।

       

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

            2-निम्‍न रक्‍त चाप (लो ब्‍लड प्रेशर Hypotension)

क्र

रोग लक्षण

औषधियॉ

 

लो ब्‍लड प्रेशर Hypotension

 

1-

वृद्ध व्‍यक्तियों की कमजोरी के कारण लो ब्‍लड प्रसर

कोनियम-200

2-

ह्रिदय गति मंद

ऐबिस नाईग्रा 30-200

3-

दिल की कोई भी शिकायत हो

डिजिटेलिस 3

4-

नाडी धीमी सांस तेज चलना हरकत से र्दद

कैलमिया

5-

लो ब्‍लड प्रेसर

कैक्‍टस ग्‍लैडी फ्लोरा

6-

हिद्रय की कमजोरी

आसैनिक आयोडेटम 3-एक्‍स

7-

रक्‍तचाप के घटने पर

एम्‍ब्राग्रिसिया जैलसिमिस कैटेगस क्‍यू

 

 

 

 

             

 

 

 

 

               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

              2- निम्‍न रक्‍त चाप (लो ब्‍लड प्रेशर Hypotension)

1-वृद्ध व्‍यक्तियों की कमजोरी के कारण लो ब्‍लड प्रसर (कोनियम-200):-यदि वृद्ध व्‍यक्तियों की कमजोरी के कारण लो ब्‍लड ,ग्‍लैंड सूखने के कारण ,अंग कमजोरी हो जाये ,मस्तिष्‍क में रक्‍त न पहुंचे इसके कारण चक्‍कर आते हो ,वृद्ध व्‍यक्तियों के लो ब्‍लड प्रेसर में यह उत्‍तम दवा है ।

2-ह्रिदय गति मंद (ऐबिस नाईग्रा 30-200):- ह्रिद्रय गति के मंद होने पर रोगी को हॉपी आती हो तो उसे ऐबिस नाईग्रा 30  या 200 शक्ति में देना चाहिये ।

3-दिल की कोई भी शिकायत हो (डिजिटेलिस 3) :- दिन की कोई भी शिकायत हो उसमें डिजिटेलिस की तरफ ध्‍यान जाना ही चाहिये लो ब्‍लड प्रेसर में निम्‍न शक्ति में इसका प्रयोग किया जाता है नाडी का धीमा होना, अनियमित,कमजोर होना,शारीर में सूजन,हॉपी चलती हो सांस का पूरा न होना ,सांस लेने की इक्‍च्‍छा का बना रहना । बहुत कमजोरी परन्‍तु जरा सी हरकत से तेज चलने लगे तो डिजिटेलिस 3 का प्रयोग करना चाहिये ।

4-नाडी धीमी सांस तेज चलना हरकत से र्दद (कैलमिया) :- नाडी धीमी चलती है एंव हरकत से ह्रिदय धडकन बड जाती है रोगी हॉपने लगता है सांसे तेज चलने लगती है इस स्थिति में कैलमिया 6 में देना चाहिये ।

5-लो ब्‍लड प्रेसर (कैक्‍टस ग्‍लैडी फ्लोरा):- लो ब्‍लड प्रेसर की कैक्‍टस ग्‍लैडी फ्लोरा क्‍यू अच्‍छी दवा है लो ब्‍लड प्रेसर के लक्षणों पर इस दवा की दस दस बूंद दिन में तीन बार देना चाहिये । कैक्‍टस मूल अर्क का हाई ब्‍लड प्रेसर में तो उपयोग होता ही है परन्‍तु इसका उपयोग ह्रिदय की कमजोरी के कारण लो ब्‍लड प्रेसर में भी किया जाता है । इसे ह्रिदय रोग की पौष्टिक दवा मानी जाती है । रोगी को श्‍वास लेने में कष्‍ट होता है वह आक्‍सीजन के लिये छटपटाता है नाडी तेज ह्रिदय शूल के साथ बाये वक्ष बाये हाथ में र्दद होता है ।

6-हिद्रय की कमजोरी (आसैनिक आयोडेटम 3-एक्‍स):- ह्रिद्रय की कमजोरी में आसैर्निक आयोडेटम   3-एक्‍स बहुत अच्‍छी दवा है ।

7-रक्‍तचाप के घटने पर (एम्‍ब्राग्रिसिया जैलसिमिस कैटेगस क्‍यू ):- यदि रक्‍त चाप कभी घटता हो कभी बढता हो तो उसे एम्‍ब्राग्रिसिया 200 की एक मात्रा एंव जैलसिमिय 30 दिन में तीन बार साथ में कैटिगस क्‍यू की पॉच पॉच बूंद आधे कप पानी में तीन बार देना चाहिये । कैटिगस क्‍यू बढे हुये कॉलेस्‍ट्रोल को धोल कर मूत्रमार्ग से बाहर कर देता है ।

               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

                 3- एन्‍जाइना पैक्‍टस

क्र

रोग लक्षण

औषधियॉ

 

एन्‍जाइना पैक्‍टस

 

 

1-

हिद्रय शूल स्‍नायविक

आसैनिक

2-

ह्रिदय की रचना में खराबी

जैलसीनियम

3-

तम्‍बाखू अथवा शराब के अधिक सेवन से हिद्रय पर बोझ

स्‍पाईजेलिया

4-

दम धुटना तेज धडकन

ग्‍लोनाईन

5-

हिद्रय रोग की प्रमुख औषधिय

कैटेगस क्‍यू

6-

पेट मे गैस की वजह से ह्रिदय में दबाव (

कार्बोवेज

7-

गैस की शिकायत

कार्बोवेज,चाईना,लाईकोपोडियम

 

 

 

 

            

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

                     3- एन्‍जाइना पैक्‍टस

  आरट्री में रक्‍त के रूक जाने पर ह्रिदय पर दवाव पडता है इससे ह्रिद्रय में र्दद होता है इस रोग  को ऐन्‍जाइना अर्थात घुटन, पैक्‍टस अर्थात छाती इस रोग में छाती में घुटन होती है इसलिये इसे एन्‍जाइना पैक्‍टस कहते है । इस रोग में रोगी की छाती में घुटन होती है रोगी छटपटाता है उसे सांस लेने में कठनाई होती है तथा शरीर पसीने से भींग जाता है इसका र्दद बाये कन्‍धे से बाई हाथ की छोटी अंगुली तक फैल जाता है ।

1-हिद्रय शूल स्‍नायविक (आसैनिक) :- अगर ह्रिद्रय शूल र्दद स्‍नायविक कारण है तो आसैनिक उसकी मुख्‍य औषधि है परन्‍तु यदि ह्रिदय की संरचना में कोई अंतर आ गया है तो इससे लाभ नही होगा ,यह केवल हिदय के र्दद पर कार्य करेगी ह्रिद्रय की रचना परिवर्तन से आई खराबी पर नही ।

2-ह्रिदय की रचना में खराबी जैलसीनियम :- अगर ह्रिदय की बनावट या रचना में खराबी आ गई है तब जैलसीनियम तथा बेलाडोना 30 दवा से रोगी को तत्‍काल राहत मिल सकती है परन्‍तु रोग पूरी तरह से ठीक नही होता ।

3-तम्‍बाखू अथवा शराब के अधिक सेवन से हिद्रय पर बोझ (स्‍पाईजेलिया):- तम्‍बाखू अथवा शराब के अधिक सेवन से ह्रिदय पर बोझ या दबाव ,दर्द ,काटने चुभने की पीडा होने पर इस दवा को 6 या 30 शक्ति में करने से लाभ होता है ।

4-दम धुटना तेज धडकन (ग्‍लोनाईन):- इसमें रोगी को इतनी तेज धडकन होती है कि रोगी को लगता है कि हिद्रय छाती को फाडकर बाहर निकल जायेगा ,दम धुटना, जो छाती में चारो तरफ फैल जाता है तथा यह बाई बॉह से नीचे तक आता है । ऐसी स्थिति में ग्‍लोनाईन 30 शक्ति में देना चाहिये ।

5-हिद्रय रोग की प्रमुख औषधिय (कैटेगस क्‍यू):- ह्रिदय शूल जो ह्रिदय के बाई तरफ से बाई बॉह से हाथ से नीचे अंगुली की तरफ जाता हो ऐसी स्थिति में यह ह्रिदय शूल के लिये ही क्‍या ह्रिदय रोगियों के लिये यह अमृत तुल्‍य औषधि है इसे मूल अर्क में पॉच पॉच बूंद आठ आठ धन्‍टे के अन्‍तर से देना चाहिये ।

6-पेट मे गैस की वजह से ह्रिदय में दबाव (कार्बोवेज):- पेट में गैस की वजह से ह्रिदय पर दबाब की वजह से ह्रिदय में दर्द या दवाब अनुभव हो रहा हो तो इस दवा को भोजन के पहले देना चाहिये ।

7-गैस की शिकायत (कार्बोवेज,चाईना,लाईकोपोडियम) :-आज के इस बदलती जीवन शैली की वजह से उल्‍टा सीधा खाना दिन चर्या में परिवर्तन आदि की वजह से गैस के बनने से पेट फूल जाता है ह्रिदय पर दबाब पडने से हिद्रय में र्दद दबाब होने लगता है इससे बचने के लिये कार्बोवेज 30 चाईना30 तथा लाईकोपोडियम 30 को आपस में मिलाकर भोजन से पहले लेने पर गैस की वजह से पेट फूलना ह्रिदय पर दबाब र्दद में आराम मिलता है एंव बार बार गैस बनाने की शिकायत दुर हो जाती है ।   

 

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

होम्‍योपैथिक

New Life